तुर्की और मुस्लिम देशों के समूह के कश्मीर को लेकर दिए बयान का क्या है मतलब
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तुर्की और मुस्लिम देशों के समूह के कश्मीर को लेकर दिए बयान का क्या है मतलब

25-Sep-2026

तुर्की ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कश्मीर का ज़िक्र किया है.

इसके साथ ही इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के जम्मू-कश्मीर पर मिनिस्टीरियल कॉन्टैक्ट ग्रुप ने कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार के लिए समर्थन दोहराया है.

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, "दक्षिण एशिया में यह ज़रूरी है कि कश्मीर के मुद्दे समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाए."

अर्दोआन जब ये भाषण दे रहे थे तब सदन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ मौजूद थे.

हालांकि भारत कश्मीर मुद्दे में किसी भी तीसरे पक्ष के दख़ल को नकारता रहा है और उसका कहना है कि इस पर केवल द्विपक्षीय बात ही हो सकती है.

तुर्की के हालिया बयान पर अभी भारत की ओर से कोई बयान नहीं आया है. हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय इससे पहले तुर्की के ऐसे बयानों को पूरी तरह ख़ारिज कर चुका है.

ओआईसी के मिनिस्टीरियल कॉन्टैक्ट ग्रुप पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने ज़रूर बयान जारी किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है, "ओआईसी के पास ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रचार को कितनी भी बार दोहराए जाने से यह वास्तविकता नहीं बदल सकती."

"इस तरह की प्रेरित कहानियों का बार-बार समर्थन करना केवल ओआईसी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. पाकिस्तान को अपने मनगढ़ंत और प्रेरित प्रचार को फैलाने के लिए एक मंच प्रदान करने के बजाय, ओआईसी को बेहतर सलाह यह होगी कि वह पाकिस्तान को सीख दे कि वह अपने गिरेबान में झांके और अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले आतंकवाद के निरंतर खतरे से निपटे."

तुर्की पहले भी कर चुका है कश्मीर का ज़िक्र

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब अर्दोआन ने कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया हो.

साल 2019 में कश्मीर के ख़ास दर्जे अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के बाद तुर्की की विवादित टिप्पणी सामने आई थीं.

सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में अर्दोआन ने कहा था, "दुर्भाग्य से 80 लाख लोग लगभग घेराबंदी की स्थिति में हैं और कश्मीर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले 72 वर्षों में इस विवाद पर पूरी तरह से ध्यान देने में विफल रहा है.

इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इस बयान के चलते पीएम मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया था. और आज तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए पीएम मोदी तुर्की दौरे पर नहीं गए हैं.

इसके बाद साल 2021 और 2025 में भी तुर्की ने कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर उठाया था.

ग़ौरतलब बात ये है कि तुर्की ने ये मुद्दा मक्का समझौते के बाद उठाया है जो पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच इस साल 7 अगस्त को हुआ है.