कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को विपक्षी दलों से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो उन्हें चुनावों में भाग लेना बंद कर देना चाहिए
उन्होंने कहा कि ऐसे चुनावों में लगातार हिस्सा लेना उन्हें वैधता देता है और यह 'भ्रम' पैदा करता है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं.
एक्स पर एक पोस्ट में दीपके ने कहा कि विपक्षी दल एक साथ यह दावा नहीं कर सकते कि चुनावों में धांधली हो रही है और फिर उनमें हिस्सा भी लेते रहें.
उन्होंने कहा, "हाँ, चुनावों में धांधली हो रही है. लेकिन जब आप धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेना जारी रखते हैं, तो आप इन चुनावों को वैधता देते हैं और इस भ्रम को बनाए रखने में मदद करते हैं कि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं."
दीपके ने सवाल किया कि क्या विपक्षी दल इसलिए चुनावों में हिस्सा लेना जारी रखते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि चुनावों से दूर रहने पर उनका राजनीतिक अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा.
उन्होंने कहा, "शायद आप इसलिए चुनाव लड़ते रहते हैं क्योंकि आपको डर है कि अगर आपने ऐसा नहीं किया, तो आपका अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा. लेकिन जब वोट चुराए जा रहे हों, आपके विधायक और सांसदों को अपने पाले में किया जा रहा हो और आपकी पार्टियों को तोड़ा जा रहा हो, तब आप किस तरह के अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?"
अभिजीत दीपके ने कहा, "यह राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई नहीं है. आप बस एक ऐसी व्यवस्था में खुद को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जो जब चाहे आपको कमजोर कर सकती है, आपकी पार्टी में फूट डाल सकती है या आपके निर्वाचित प्रतिनिधियों को आपसे छीन सकती है. आप इस तरह आखिर कब तक टिक पाएंगे?"
"और आप चुनाव में धांधली की बात सिर्फ तभी नहीं कर सकते, जब ऐसा उन राज्यों में हो जो आपके लिए मायने रखते हैं, और दूसरे राज्यों में ऐसा होने पर चुप रहें. अगर चुनाव में धांधली हो रही है, तो इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि वह किस राज्य में हो रही है या किस पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है."
"आप धांधली का आरोप लगाते हुए उसी चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना जारी नहीं रख सकते. आपकी भागीदारी ही इन कथित धांधली वाले चुनावों को वैधता देती है."
उन्होंने अपील की, "अपनी राजनीतिक सलामती के बारे में सोचने से पहले देश और उसके लोकतंत्र के बारे में सोचिए. अपना रुख स्पष्ट कीजिए और धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेना बंद कीजिए."
अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को एक फिर दोहराया कि अगर कल यानी शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफ़ा नहीं दिया तो सीजेपी 2 अक्तूबर से पूरे देश में प्रदर्शन शुरू करेगी.
दीपके ने लिखा, "इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र का बचाने का संकल्प लें."
सीजेपी ने तीन मांग रखी हैं-
इससे पहले अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है.
इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल ख़ासा चर्चित और विवादों में रहा है. अपने कई फ़ैसलों को लेकर वो विपक्ष के निशाने पर रहे हैं..
दीपके के सुझाव को लेकर अभी तक किसी पार्टी ने कोई अपना स्पष्ट नज़रिया ज़ाहिर नहीं किया है लेकिन कुछ लोगों ने इससे जुड़ी चिंताएं साझा की हैं.
डीएमके नेता ए. सरवनन ने चिंता ज़ाहिर की कि चुनाव बहिष्कार के इस कदम से विपक्ष को ही नुकसान हो सकता है.