नोएडा की डीएम मेधा रूपम के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर अधिवक्ताओं के एक संगठन ने जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के एक ही दिन हुई दो सुनवाई किए जाने पर सवाल उठाए हैं.
लॉयर्स एसोसिएशन फ़ॉर कंस्ट्यूिशन (एलएएफ़सी) ने एक पत्र लिख कर 23 सितंबर को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की ओर से दो मामलों की सुनवाई किए जाने को 'न्यायिक मर्यादा' का उल्लंघन बताया है.
लाइव लॉ के अनुसार, एसोसिएशन ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका को संविधान पीठ के पास भेजे जाने और नोएडा की डीएम को अंतरिम राहत देने के आदेश को वापस लिया जाए.
एसोसिएशन ने यह मांग उन ख़बरों के सामने आने के बाद की है, जिनमें कहा गया है कि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल हैं.
एसोसिएशन ने इस बात का भी ज़िक्र किया है कि मेधा रूपम, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं और मांग की है कि इन मामलों की नए सिरे से सुनवाई ऐसी पीठ करे, जिसमें जस्टिस शर्मा शामिल न हों.
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि न्यायाधीशों के क़रीबी रिश्तेदारों को मामले में शामिल पक्षों की ओर से किसी भी तरह की नियुक्ति दिए जाने पर जानकारी सार्वजनिक करने के लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया तय की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले में लाइव लॉ की खबर साझा करते हुए कई सवाल उठाए हैं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक़, 2017 में वकालत में नामांकन कराने वाले जस्टिस शर्मा के बेटे भारत निर्वाचन आयोग के स्थायी वकील हैं. वह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और आयकर विभाग के भी स्थायी वकील हैं. उनके छोटे बेटे ने 2020 में वकालत में नामांकन कराया था और वह मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के स्थायी वकील भी हैं. क्या जस्टिस शर्मा को निर्वाचन आयोग से जुड़े मामले और ज्ञानेश कुमार की बेटी के मामले की सुनवाई से खुद को अलग नहीं कर लेना चाहिए था?"
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, "भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा, जस्टिस शर्मा के बेटे, जबलपुर में वकालत करते हैं. उन्हें निर्वाचन आयोग ने अपने वकील के पैनल में शामिल किया है और वह आयोग की ओर से अदालत में पेश भी हो चुके हैं."
"ऐसे में उनके पिता ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त, से जुड़े मामले की सुनवाई कैसे कर सकते हैं? मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी को राहत देने के लिए उनके मामले को तय रोस्टर से हटाकर प्राथमिकता कैसे दी जा सकती है?"