भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अन्य आर्थिक दबावों के बावजूद भारत के आवासीय बाजार ने 2026 की तीसरी तिमाही में फिर गति पकड़ी। मजबूत अंतिम-उपभोक्ता मांग के कारण दूसरी तिमाही की सुस्ती के बाद आवास बिक्री में तेजी आई, हालांकि बढ़ती लागत और बाजारों में असमान मांग के कारण वृद्धि सीमित दायरे में ही रही। देश के सात प्रमुख शहरों में जुलाई-सितंबर के दौरान मकानों की बिक्री सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर एक लाख इकाइयों से अधिक हो गई। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), बेंगलुरु और हैदराबाद में मजबूत मांग इसकी मुख्य वजह रही।
रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक ने जुलाई-सितंबर तिमाही के प्राथमिक आवासीय बाजार के आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष सात शहरों में आवास बिक्री में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। तीसरी तिमाही में करीब 1,00,220 इकाइयां बेची गईं, जबकि 2025 की तीसरी तिमाही में 97,080 इकाइयां बेची गई थीं। मूल्य के लिहाज से जुलाई-सितंबर के दौरान कुल बिक्री 2 प्रतिशत बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.52 लाख करोड़ रुपये थी।
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), बेंगलुरु और हैदराबाद में बिक्री बढ़ी, जबकि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), पुणे, चेन्नई और कोलकाता में बिक्री में गिरावट आई। रियल ए estate सलाहकार कंपनी एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि 2026 की तीसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में शीर्ष सात शहरों की कुल आवास बिक्री में एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत रही।
इन सात शहरों में 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 1,14,320 आवासीय इकाइयां पेश की गईं, जबकि 2025 की तीसरी तिमाही में 96,690 इकाइयां पेश की गई थीं। इस तरह नई आपूर्ति में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बजट श्रेणियों की बात करें तो 80 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की नई आपूर्ति में सबसे अधिक 34 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद 1.5 करोड़ रुपये से 2.5 करोड़ रुपये की श्रेणी की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। तिमाही के दौरान कुल नई आपूर्ति में 40 लाख रुपये से 80 लाख रुपये की श्रेणी का योगदान 17 प्रतिशत रहा, जबकि 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी सबसे कम 14 प्रतिशत रही।
पुरी का कहना है कि आगामी त्योहारी सीजन में आवासीय मांग में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे तीसरी तिमाही में देखी गई गति को और बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ऊंची कीमतों और बढ़ती सामर्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण खरीदार शायद चुनिंदा निवेश ही करेंगे, लेकिन त्योहारी माहौल, स्थिर ब्याज दरें और नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी संख्या से बिक्री को समर्थन मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मांग मजबूत है, लेकिन अधिक संयमित वृद्धि की उम्मीद है। उचित कीमत और अच्छी लोकेशन वाले ऐसे प्रोजेक्ट, जो मौजूदा मांग के अनुरूप हैं, इस त्योहारी सीजन में अन्य प्रोजेक्ट्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
शीर्ष सात शहरों में 2026 की तीसरी तिमाही में लगभग 1,14,320 आवासीय इकाइयां लॉन्च की गईं, जबकि 2025 की तीसरी तिमाही में 96,690 इकाइयां लॉन्च की गई थीं। यह सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि है। तिमाही आधार पर नए लॉन्च में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2026 की दूसरी तिमाही में शीर्ष सात शहरों में लगभग 1,05,995 इकाइयां लॉन्च की गई थीं।
2026 की तीसरी तिमाही में नई आपूर्ति में योगदान देने वाले प्रमुख शहर एमएमआर (मुंबई महानगरीय क्षेत्र), पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद रहे। इन चार शहरों की कुल नई आपूर्ति में 81 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
शीर्ष सात शहरों में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमत में सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। यह 2025 की तीसरी तिमाही में 9,105 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2026 की तीसरी तिमाही में 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई। एनसीआर में औसत कीमत में सबसे अधिक 12 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। तिमाही आधार पर औसत कीमतों में सिर्फ 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
शीर्ष सात शहरों में कुल उपलब्ध इन्वेंट्री सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 2026 की तीसरी तिमाही के अंत तक लगभग 6,30,590 इकाइयों पर पहुंच गई। 2025 की तीसरी तिमाही में उपलब्ध इन्वेंट्री करीब 5,61,760 इकाइयां थी, जबकि 2026 की दूसरी तिमाही में यह लगभग 6,16,500 इकाइयां थी।
देश के सात प्रमुख शहरों में कार्यालय स्थलों की मजबूत मांग के दम पर जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सकल पट्टा मांग सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ी। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी कोलियर्स इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की तीसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में सकल कार्यालय पट्टा मांग सालाना आधार पर 1.72 करोड़ वर्ग फुट से बढ़कर करीब 1.87 करोड़ वर्ग फुट हो गई।
बेंगलुरु, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), हैदराबाद और कोलकाता में पट्टा गतिविधियां बढ़ीं, जबकि मुंबई, पुणे और चेन्नई में मांग कम रही। सकल पट्टा मांग में पट्टों का नवीनीकरण, पहले से किए गए समझौते और केवल आशय पत्र (एलओआई) के आधार पर हुए सौदे शामिल नहीं होते हैं।